महाभ्रष्ट और लूटेरे एस एस प्रसाद, भगवान पाण्डेय और टी बनर्जी से डीवीसी को बचाओ !
पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में है। अमेरिका जैसे पूँजीवादी देश की भी हालत खराब है।
हम जिस दामोदर घाटी निगम(डीवीसी) में नौकरी कर रहे हैं,उसकी भी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सुना है कि पिछले दो महीने का वेतन ओवरड्राफ्ट से हुआ है। यह भी सुना है कि अब बैंकों ने भी निगम को ऋण देने से इनकार कर दिया है। क्योंकि पहले ही डीवीसी हजारों करोड़ का कर्ज बैंकों से ले चुका है। पता नहीं अगला वेतन कैसे होगा ? यहाँ तो कोई मनमोहन सिंह या बुश नहीं है,जो निगम को बचाने के लिए आगे आए। यहाँ जो भी है, वह निगम को लूट कर अपने घर ले जा रहा है। ऊपर से नीचे तक, सभी सक्षम पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इसमें शामिल हैं। हम सोने का सिक्का और 13,200रुपये का भीख लेकर आनंदित हैं। टकटकी लगाए बैठे हैं,पे-रिविजन का। लाखों रुपये एरीयर मिलने का हिसाब लगा रहे हैं।
आप भी जानते हैं कि डीवीसी के सिविल विभाग में भ्रष्टाचार चरमसीमा पर है। इस विभाग ने लूट की अपनी सारी सीमाएँ लाँघ दी है। डीवीसी के कर्मचारियों के मेहनत का पैसा ये कुछ भ्रष्ट अफसर लूट कर अपना घर भर रहे हैं। दूसरी ओर डीवीसी की आर्थिक हालत खराब होती जा रही है। यदि वेतन बंद भी हो जाए तो इन लुटेरे अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फर्क पड़ेगा तो ईमानदार अफसरों ओर कर्मचारियों को।
डीवीसी सीविल विभाग के अभियंता सिर्फ ऐसे फिराक में रहते हैं कि कैसे डीवीसी के धन को अंधाधुंध लूटा जाए। लूट के नये-नये तरीके ये ईजाद करते हैं। इनके लूटने का नया तरीका अभी आप सभी के सामने है। पहले पुराने प्लास्टर को तोड़कर फिर से प्लास्टर चढ़ाने का धंधा आप देख चुके हैं। अब लुटेरों का मनोबल देखिए, वह अब सड़क किनारे का घास छिलवा रहा है। हो सकता फिर से घास लगाने का भी काम होगा। सुना है कि घास छिलाई पर 15लाख रुपये खर्च होंगे। (इसके बाद घास लगाई पर कितना खर्च होगा ?) इसके लिए कोई टेंडर नहीं हुआ है। सुना है,सब कुछ भरबल है। जरुरी काम नहीं होता है। हम कर्मचारियों से परक्यूजिट वसूला जाता है। लेकिन क्वारटरों का क्या हाल है,आप जानते हैं। बरसात में छत से टपकते पानी को बर्तनों में बटोरते रातें बीत जाती हैं। लेकिन इन लूटेरों के पास इन छतों को ठीक कराने के लिए पैसे नहीं होते। फर्श टूटा है,दरवाजे खिड़कियाँ टूटी हुई हैं, सिलिंग फट गया है, लेकिन लाख शिकायतों के बाद भी यह सब काम नहीं होता। कहते हैं कि फंड नहीं है। लेकिन मुख्य अभियंता(सिविल) का बंगला जाकर देखिए, ढाई से तीन लाख रुपये खर्च कर इनके बंगले को सजाया गया है। तो साफ है कि इन लूटेरों के लिए सब कुछ है, लेकिन हम कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं। उल्टे ये हमारी डीवीसी को खुलेआम लूट रहे हैं।
यह तो बहुत ही छोटा उदाहरण है। आप भी सब कुछ जानते हैं। अब आपको यह बताने की जरुरत है कि ये लुटेरे कौन हैं ? वह है डीवीसी सीविल विभाग का मुखिया,लूटेरों का बादशाह और महाभ्रष्ट मुख्य अभियंता(सिविल) एस एस प्रसाद। इसके साथ है इसी की तरह एक और महाभ्रष्ट एस ई (सर्किल-2),मैथन, भगवान पाण्डेय। और तीसरा है, भ्रष्टाचार में किसी से कम नहीं, टी बनर्जी,एस डी ई (सिविल),मैथन।
कर्मचारियों एवं ईमानदार अफसरों की मेहनत की कमाई का धन ये कुछ लुटेरे लूट रहे हैं। हम हैं कि चुपचाप इन लुटेरों को देख रहे हैं। यह डीवीसी किसका है ? ऐसे लुटेरों का है या हग कर्मचारियों का भी है ? डीवीसी उनका भी है जिन्होंने अपनी मेहनत से इसे इस उँचाई तक पहुँचाया है और अभी अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। यदि डीवीसी हमारा है तो हम चुप क्यों हैं ? ट्रेड यूनियन नेताओं का गिरेबान क्यों नहीं पकड़ते कि वे क्यों चुप हैं ? यदि वे हमारी नहीं सुनते तो हम क्यों नहीं सीधे इन लुटेरों का गिरेबान पकड़ते ?
मित्रों,डरने की कोई बात नहीं है। डीवीसी को इन लुटेरों से बचाना हमारा राष्ट्रीय धर्म है। हमें राष्ट्रीय धर्म निभाने से नहीं डरना चाहिए। यदि हम इसमें चुक गए,तो यकीन मानिए,वह दिन दूर नहीं, जब डीवीसी को भी एक बीमार उद्योग घोषित कर दिया जाए। यह किसी टाटा,रिलायंस या किसी मल्टीनेशनल कंपनी के हाथों बिक जाए। तब आप कुछ नहीं कर सकते हैं। हमारे बच्चों का क्या होगा, जरा सोचिए तो !
हम कुछ मित्रों ने मिलकर काफी सोच-विचार किया है और एक अभियान दल का निर्माण किया है। यह पहली दस्तक है। हम आगे भी दस्तक देते रहेंगे। लेकिन हमें आपके सुझाव और विचारों की सख्त आवश्यकता है। हम जानते हैं कि आप अभी डरेंगे। लेकिन आप अपना नाम –पता गुप्त रखते हुए भी हम तक अपने विचार पहुँचा सकते हैं। हमने Internet पर एक वेबसाइट(ब्लॉग) बनाया है- http://www.abhiyaandal.blogspot.com/ आप इस ब्लॉग पर जाकर अपने विचार प्रकट कर सकते हैं, आप चाहें तो अपना परिचय गुप्त रख सकते हैं। इस ब्लॉग पर और भी जानकारियाँ मिल सकती हैं। इसके जरिए हम संवाद कायम कर सकते हैं।
हम जिस दामोदर घाटी निगम(डीवीसी) में नौकरी कर रहे हैं,उसकी भी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सुना है कि पिछले दो महीने का वेतन ओवरड्राफ्ट से हुआ है। यह भी सुना है कि अब बैंकों ने भी निगम को ऋण देने से इनकार कर दिया है। क्योंकि पहले ही डीवीसी हजारों करोड़ का कर्ज बैंकों से ले चुका है। पता नहीं अगला वेतन कैसे होगा ? यहाँ तो कोई मनमोहन सिंह या बुश नहीं है,जो निगम को बचाने के लिए आगे आए। यहाँ जो भी है, वह निगम को लूट कर अपने घर ले जा रहा है। ऊपर से नीचे तक, सभी सक्षम पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इसमें शामिल हैं। हम सोने का सिक्का और 13,200रुपये का भीख लेकर आनंदित हैं। टकटकी लगाए बैठे हैं,पे-रिविजन का। लाखों रुपये एरीयर मिलने का हिसाब लगा रहे हैं।
आप भी जानते हैं कि डीवीसी के सिविल विभाग में भ्रष्टाचार चरमसीमा पर है। इस विभाग ने लूट की अपनी सारी सीमाएँ लाँघ दी है। डीवीसी के कर्मचारियों के मेहनत का पैसा ये कुछ भ्रष्ट अफसर लूट कर अपना घर भर रहे हैं। दूसरी ओर डीवीसी की आर्थिक हालत खराब होती जा रही है। यदि वेतन बंद भी हो जाए तो इन लुटेरे अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फर्क पड़ेगा तो ईमानदार अफसरों ओर कर्मचारियों को।
डीवीसी सीविल विभाग के अभियंता सिर्फ ऐसे फिराक में रहते हैं कि कैसे डीवीसी के धन को अंधाधुंध लूटा जाए। लूट के नये-नये तरीके ये ईजाद करते हैं। इनके लूटने का नया तरीका अभी आप सभी के सामने है। पहले पुराने प्लास्टर को तोड़कर फिर से प्लास्टर चढ़ाने का धंधा आप देख चुके हैं। अब लुटेरों का मनोबल देखिए, वह अब सड़क किनारे का घास छिलवा रहा है। हो सकता फिर से घास लगाने का भी काम होगा। सुना है कि घास छिलाई पर 15लाख रुपये खर्च होंगे। (इसके बाद घास लगाई पर कितना खर्च होगा ?) इसके लिए कोई टेंडर नहीं हुआ है। सुना है,सब कुछ भरबल है। जरुरी काम नहीं होता है। हम कर्मचारियों से परक्यूजिट वसूला जाता है। लेकिन क्वारटरों का क्या हाल है,आप जानते हैं। बरसात में छत से टपकते पानी को बर्तनों में बटोरते रातें बीत जाती हैं। लेकिन इन लूटेरों के पास इन छतों को ठीक कराने के लिए पैसे नहीं होते। फर्श टूटा है,दरवाजे खिड़कियाँ टूटी हुई हैं, सिलिंग फट गया है, लेकिन लाख शिकायतों के बाद भी यह सब काम नहीं होता। कहते हैं कि फंड नहीं है। लेकिन मुख्य अभियंता(सिविल) का बंगला जाकर देखिए, ढाई से तीन लाख रुपये खर्च कर इनके बंगले को सजाया गया है। तो साफ है कि इन लूटेरों के लिए सब कुछ है, लेकिन हम कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं। उल्टे ये हमारी डीवीसी को खुलेआम लूट रहे हैं।
यह तो बहुत ही छोटा उदाहरण है। आप भी सब कुछ जानते हैं। अब आपको यह बताने की जरुरत है कि ये लुटेरे कौन हैं ? वह है डीवीसी सीविल विभाग का मुखिया,लूटेरों का बादशाह और महाभ्रष्ट मुख्य अभियंता(सिविल) एस एस प्रसाद। इसके साथ है इसी की तरह एक और महाभ्रष्ट एस ई (सर्किल-2),मैथन, भगवान पाण्डेय। और तीसरा है, भ्रष्टाचार में किसी से कम नहीं, टी बनर्जी,एस डी ई (सिविल),मैथन।
कर्मचारियों एवं ईमानदार अफसरों की मेहनत की कमाई का धन ये कुछ लुटेरे लूट रहे हैं। हम हैं कि चुपचाप इन लुटेरों को देख रहे हैं। यह डीवीसी किसका है ? ऐसे लुटेरों का है या हग कर्मचारियों का भी है ? डीवीसी उनका भी है जिन्होंने अपनी मेहनत से इसे इस उँचाई तक पहुँचाया है और अभी अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। यदि डीवीसी हमारा है तो हम चुप क्यों हैं ? ट्रेड यूनियन नेताओं का गिरेबान क्यों नहीं पकड़ते कि वे क्यों चुप हैं ? यदि वे हमारी नहीं सुनते तो हम क्यों नहीं सीधे इन लुटेरों का गिरेबान पकड़ते ?
मित्रों,डरने की कोई बात नहीं है। डीवीसी को इन लुटेरों से बचाना हमारा राष्ट्रीय धर्म है। हमें राष्ट्रीय धर्म निभाने से नहीं डरना चाहिए। यदि हम इसमें चुक गए,तो यकीन मानिए,वह दिन दूर नहीं, जब डीवीसी को भी एक बीमार उद्योग घोषित कर दिया जाए। यह किसी टाटा,रिलायंस या किसी मल्टीनेशनल कंपनी के हाथों बिक जाए। तब आप कुछ नहीं कर सकते हैं। हमारे बच्चों का क्या होगा, जरा सोचिए तो !
हम कुछ मित्रों ने मिलकर काफी सोच-विचार किया है और एक अभियान दल का निर्माण किया है। यह पहली दस्तक है। हम आगे भी दस्तक देते रहेंगे। लेकिन हमें आपके सुझाव और विचारों की सख्त आवश्यकता है। हम जानते हैं कि आप अभी डरेंगे। लेकिन आप अपना नाम –पता गुप्त रखते हुए भी हम तक अपने विचार पहुँचा सकते हैं। हमने Internet पर एक वेबसाइट(ब्लॉग) बनाया है- http://www.abhiyaandal.blogspot.com/ आप इस ब्लॉग पर जाकर अपने विचार प्रकट कर सकते हैं, आप चाहें तो अपना परिचय गुप्त रख सकते हैं। इस ब्लॉग पर और भी जानकारियाँ मिल सकती हैं। इसके जरिए हम संवाद कायम कर सकते हैं।