Monday, November 17, 2008

डीवीसी बचाओ-देश बचाओ अभियान


यह लूट का ब्यूटिफिकेशन है !
अभियान दल के प्रथम प्रयास को डीवीसी के कर्मचारियों,पदाधिकारियों और आम लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसे कर्मचारियों के बीच रह कर हमलोगों ने काफी करीब से महसूस किया। लोगों की प्रतिक्रियाएँ बहुत ही सकारात्मक और उत्साहवर्द्धक रही। हमारी पहली दस्तक ने डीवीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बहस की शुरुआत कर दी है,यह हमारी पहली सफलता है। हमारे वेबसाईट पर आए कई लोगों की प्रतिक्रियाओँ ने भी हमारा उत्साह बढ़ाया है। भ्रष्ट अभियंताओं और उनके दलाल ठीकेदारों की प्रतिक्रिया चाहे जो हो,हमें उससे कोई मतलब नहीं है। हमें तो डीवीसी में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आमलोगों को जगाना है।
अभियान दल के सदस्यों ने सुना कि अभियान दल ने जिन तीन भ्रष्टाचारियों का जिक्र किया था,उनमें से एक का ट्रांसफर हो गया। लोगों को लगता है कि यह हमारे “ डीवीसी बचाओ - देश बचाओ अभियान ” के कारण हुआ। डीवीसी प्रबंधन जाग गया है और सतर्कता जागरुकता सप्ताह के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। लेकिन अभियान दल जानता है कि टी बनर्जी का मैथन से ट्रांसफर हमारे कारण नहीं हुआ है और ना ही प्रबंधन ने भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए बनर्जी का ट्रांसफर किया है। बल्कि यह ट्रांसफर एक बड़े भ्रष्टाचारी को ताकतवर बनाने के लिए किया गया है। हमें जानकारी है कि भगवान पाण्डेय और टी बनर्जी के बीच रिश्वत की रकम के हिस्सेदारी को लेकर पहले तो जमकर बोला-बोली हुई और बाद में यह गाली-गलौज तक पहुँच गई। दोनों एक दूसरे से बड़ा रिश्वतखोर और बेशर्म। इस रिश्वत युद्ध में कौन दबने वाला था। रिश्वत के बँटवारे के सवाल पर टी बनर्जी का अड़ जाना पाण्डे को बहुत ही खराब लगा। उसने कोलकाता के भ्रष्ट लॉबी का साथ मिला और टी बनर्जी का ट्रांसफर करवा दिया। पाण्डेय को एस एस प्रसाद,मुख्य अभियंता का जबरदस्त समर्थन तो है ही। बनर्जी का ट्रांसफर एक मेसेज है कि जो भी लूट के रकम में से पाण्डेय को भरपूर हिस्सा नहीं देगा,उसका हश्र ऐसा ही होगा। डीवीसी प्रबंधन ने पाण्डेय के मनोबल को बढ़ाया है, उसे संरक्षण दिया है।
दरअसल,अभी सिविल विभाग में इतना ज्यादा फंड आ गया है कि उसे खर्च करना और उसमें से लूट के मोटी रकम को पचाना एस एस प्रसाद, भगवान पाण्डेय और टी बनर्जी जैसे अभियंताओं के लिए मुश्किल हो रही है। करोड़ों का फंड खर्च करने की जगह नहीं मिल रही है। सड़क किनारे का घास छिला गया। जहाँ घास छिला गया था,वहाँ अब फिर से घास जम गया है। पता नहीं फिर से घास छिला जाय। आप गौर,कीजिए, गली-गली में पीसीसी एप्रोच रोड ढाला जा रहा है। जिस काम की जरुरत नहीं है,वह सब काम हो रहा है। मकसद एक ही है, फंड को लूट लेना है। फंड लूट के लिए ही सिविल विभाग में कुत्तों जैसी छीना-झपटी मची हुई है। भगवान पाण्डेय और बनर्जी का झगड़ा इसी फंड के कारण हुआ। कौन कितना लूट सकता है,इसकी प्रतिद्वंद्विता चल रही है। जिओ और जीने दो की तर्ज पर, “ खुद लूटो और अपने चहेतों को भी लूटने दो ” का दौर चल रहा है।
आप यह भी जानते हैं कि यह सारा फंड हमारे चेयरमैन और सेक्रेटरी के विजनरी कार्यक्रम ब्यूटिफिकेशन के लिए आया है। अर्थात् सौन्दर्यीकरण के लिए। आप देख रहे हैं कि सौन्दर्यीकरण/ब्यूटिफिकेशन का कार्य कैसा चल रहा है। नाले और नालियाँ गंदगी से बजबजा रहीं है,इनके कारण मच्छरों की संख्या काफी बढ़ गई है। मच्छरों के कारण बीमारियाँ फैल रही हैं। इन बीमारियों के शिकार आपके बच्चे हो रहे हैं। जंगल-झाड़ लगा हुआ है। गंदगी पसरी हुई है। क्वार्टरों की हालत बहुत ही बुरी है। पीने का पानी भी शुद्ध नहीं है। ज्यादातर बीमारियाँ पानी के कारण हो रहीं है। लेकिन इनमें सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं।
सिविल विभाग द्वारा कॉलोनी का ब्यूटिफिकेशन नहीं किया जा रहा है, दरअसल,यह लूट का ब्यूटिफिकेशन है,लूट का सौन्दर्यीकरण ! जैसे,कुछ ब्यूटी पार्लरों में ब्यूटिफिकेशन के नाम पर सेक्स का धंधा चलता है,वैसे ही डीवीसी में ब्यूटिफिकेशन के नाम पर लूट का धंधा चल रहा है। वैसे लूट के इस धंधे की गंगोत्री कहीं और है,प्रसाद,पाण्डेय और बनर्जी जैसे तो नाले हैं।
मित्रों, एक टीवी चैनल पर एक एंकर कहता है- “ चैन से सोना है, तो जागते रहो। ” अब आपको तय करना है कि आप क्या चाहते हैं। यदि डीवीसी को बर्बाद होने से बचाना है तो जागिए। अपना राष्ट्रीय धर्म निभाएँ। अब भी मौका है,डीवीसी को बचाया जा सकता है। यदि चुक गए तो आने वाली पीढ़ी आपको माफ नहीं करेगी,याद रखें।
एक बात और, अभी चेयरमैन ए के बर्मन पंचेत आये हुए थे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष डीवीसी को पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा मुनाफा होगा।परन्तु, अभियान दल के पास जो सूचनाएँ हैं,उसके अनुसार डीवीसी इस वर्ष अभी तक लगभग 250 करोड रुपये के घाटे में है। पता नहीं आगे क्या होगा। हो सकता है बर्मन साहब ही सच बोल रहे हों। लेकिन परिस्थितियाँ विपरीत हैं।
इस पर्चे को आप http://www.abhiyaandal.blogspot.com/ पर भी पढ़ सकते हैं और अपनी प्रतिक्रियाएँ दे सकते हैं। आप इस Email: abhiyaandal@gmail.com पर भी हमें अपनी प्रतिक्रियाएँ,सुझाव और जानकारियाँ दे सकते हैं। आपका नाम पता गुप्त रखा जाएगा। जो भी व्यक्ति अभियान दल से जुड़ना चाहते हैं,वे भी हमसे संपर्क कर सकते हैं।


Sunday, October 26, 2008

डीवीसी बचाओ-देश बचाओ अभियान

महाभ्रष्ट और लूटेरे एस एस प्रसाद, भगवान पाण्डेय और टी बनर्जी से डीवीसी को बचाओ !
पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में है। अमेरिका जैसे पूँजीवादी देश की भी हालत खराब है।
हम जिस दामोदर घाटी निगम(डीवीसी) में नौकरी कर रहे हैं,उसकी भी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। सुना है कि पिछले दो महीने का वेतन ओवरड्राफ्ट से हुआ है। यह भी सुना है कि अब बैंकों ने भी निगम को ऋण देने से इनकार कर दिया है। क्योंकि पहले ही डीवीसी हजारों करोड़ का कर्ज बैंकों से ले चुका है। पता नहीं अगला वेतन कैसे होगा ? यहाँ तो कोई मनमोहन सिंह या बुश नहीं है,जो निगम को बचाने के लिए आगे आए। यहाँ जो भी है, वह निगम को लूट कर अपने घर ले जा रहा है। ऊपर से नीचे तक, सभी सक्षम पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इसमें शामिल हैं। हम सोने का सिक्का और 13,200रुपये का भीख लेकर आनंदित हैं। टकटकी लगाए बैठे हैं,पे-रिविजन का। लाखों रुपये एरीयर मिलने का हिसाब लगा रहे हैं।
आप भी जानते हैं कि डीवीसी के सिविल विभाग में भ्रष्टाचार चरमसीमा पर है। इस विभाग ने लूट की अपनी सारी सीमाएँ लाँघ दी है। डीवीसी के कर्मचारियों के मेहनत का पैसा ये कुछ भ्रष्ट अफसर लूट कर अपना घर भर रहे हैं। दूसरी ओर डीवीसी की आर्थिक हालत खराब होती जा रही है। यदि वेतन बंद भी हो जाए तो इन लुटेरे अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फर्क पड़ेगा तो ईमानदार अफसरों ओर कर्मचारियों को।
डीवीसी सीविल विभाग के अभियंता सिर्फ ऐसे फिराक में रहते हैं कि कैसे डीवीसी के धन को अंधाधुंध लूटा जाए। लूट के नये-नये तरीके ये ईजाद करते हैं। इनके लूटने का नया तरीका अभी आप सभी के सामने है। पहले पुराने प्लास्टर को तोड़कर फिर से प्लास्टर चढ़ाने का धंधा आप देख चुके हैं। अब लुटेरों का मनोबल देखिए, वह अब सड़क किनारे का घास छिलवा रहा है। हो सकता फिर से घास लगाने का भी काम होगा। सुना है कि घास छिलाई पर 15लाख रुपये खर्च होंगे। (इसके बाद घास लगाई पर कितना खर्च होगा ?) इसके लिए कोई टेंडर नहीं हुआ है। सुना है,सब कुछ भरबल है। जरुरी काम नहीं होता है। हम कर्मचारियों से परक्यूजिट वसूला जाता है। लेकिन क्वारटरों का क्या हाल है,आप जानते हैं। बरसात में छत से टपकते पानी को बर्तनों में बटोरते रातें बीत जाती हैं। लेकिन इन लूटेरों के पास इन छतों को ठीक कराने के लिए पैसे नहीं होते। फर्श टूटा है,दरवाजे खिड़कियाँ टूटी हुई हैं, सिलिंग फट गया है, लेकिन लाख शिकायतों के बाद भी यह सब काम नहीं होता। कहते हैं कि फंड नहीं है। लेकिन मुख्य अभियंता(सिविल) का बंगला जाकर देखिए, ढाई से तीन लाख रुपये खर्च कर इनके बंगले को सजाया गया है। तो साफ है कि इन लूटेरों के लिए सब कुछ है, लेकिन हम कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं। उल्टे ये हमारी डीवीसी को खुलेआम लूट रहे हैं।
यह तो बहुत ही छोटा उदाहरण है। आप भी सब कुछ जानते हैं। अब आपको यह बताने की जरुरत है कि ये लुटेरे कौन हैं ? वह है डीवीसी सीविल विभाग का मुखिया,लूटेरों का बादशाह और महाभ्रष्ट मुख्य अभियंता(सिविल) एस एस प्रसाद। इसके साथ है इसी की तरह एक और महाभ्रष्ट एस ई (सर्किल-2),मैथन, भगवान पाण्डेय। और तीसरा है, भ्रष्टाचार में किसी से कम नहीं, टी बनर्जी,एस डी ई (सिविल),मैथन
कर्मचारियों एवं ईमानदार अफसरों की मेहनत की कमाई का धन ये कुछ लुटेरे लूट रहे हैं। हम हैं कि चुपचाप इन लुटेरों को देख रहे हैं। यह डीवीसी किसका है ? ऐसे लुटेरों का है या हग कर्मचारियों का भी है ? डीवीसी उनका भी है जिन्होंने अपनी मेहनत से इसे इस उँचाई तक पहुँचाया है और अभी अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। यदि डीवीसी हमारा है तो हम चुप क्यों हैं ? ट्रेड यूनियन नेताओं का गिरेबान क्यों नहीं पकड़ते कि वे क्यों चुप हैं ? यदि वे हमारी नहीं सुनते तो हम क्यों नहीं सीधे इन लुटेरों का गिरेबान पकड़ते ?
मित्रों,डरने की कोई बात नहीं है। डीवीसी को इन लुटेरों से बचाना हमारा राष्ट्रीय धर्म है। हमें राष्ट्रीय धर्म निभाने से नहीं डरना चाहिए। यदि हम इसमें चुक गए,तो यकीन मानिए,वह दिन दूर नहीं, जब डीवीसी को भी एक बीमार उद्योग घोषित कर दिया जाए। यह किसी टाटा,रिलायंस या किसी मल्टीनेशनल कंपनी के हाथों बिक जाए। तब आप कुछ नहीं कर सकते हैं। हमारे बच्चों का क्या होगा, जरा सोचिए तो !
हम कुछ मित्रों ने मिलकर काफी सोच-विचार किया है और एक अभियान दल का निर्माण किया है। यह पहली दस्तक है। हम आगे भी दस्तक देते रहेंगे। लेकिन हमें आपके सुझाव और विचारों की सख्त आवश्यकता है। हम जानते हैं कि आप अभी डरेंगे। लेकिन आप अपना नाम –पता गुप्त रखते हुए भी हम तक अपने विचार पहुँचा सकते हैं। हमने Internet पर एक वेबसाइट(ब्लॉग) बनाया है- http://www.abhiyaandal.blogspot.com/ आप इस ब्लॉग पर जाकर अपने विचार प्रकट कर सकते हैं, आप चाहें तो अपना परिचय गुप्त रख सकते हैं। इस ब्लॉग पर और भी जानकारियाँ मिल सकती हैं। इसके जरिए हम संवाद कायम कर सकते हैं।